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14वें आल इंडिया मुशायरे का आयोजन, योगी के मंत्री ने कहा कि देशभक्ति के लिए किसी से प्रमाण लेने की जरूरत नहीं



आजमगढ़ : सरायमीर के कौरागहनी में गुरुवार की रात 14वें आल इंडिया मुशायरे में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या उपस्थित हुए।  सर सैयद एजुकेशनल सोसायटी के तत्वावधान में पूर्व मुख्यमंत्री व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती समारोह में स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा कि देशभक्ति के लिए किसी से प्रमाण-पत्र लेने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह देश हम सबका है। यहां की मिट्टी गवाह है कि जब भी देश और देश की जनता के सामने कोई मुश्किल आयी है। हर धर्म, संप्रदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर उसका सामना किया है।
  उन्होंने कहा कि इस देश के लिए सरदार भगत सिंह अगर शहीद हुए हैं तो अशफाउल्लाह खान ने भी अपनी जान देकर देकर देश को आजाद कराया। वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान के छह टैंकों को तोड़कर देश की रक्षा की थी। उन्होंने उर्दू जबान के हवाले पर कहाकि जबानें किसी की धरोहर नहीं हुआ करती, जबानों पर महारत रखने वाला ही सच्चा हितैषी होता है।
  पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने कहाकि उर्दू जबान की हमेशा से साझी विरासत रही है लेकिन अफसोस उर्दू जबान को मुसलमानों के नाम से जोड़ दिया गया। वहीं नफरतों के नाम पर इंसान को मारकर इंसान फिल्म बना रहा है। खुद के फायदे के नाम पर लोग जानी दुश्मन बने हुए हैं। ऐसे में इस तरह के मुशायरे दिलों को जोड़ने का कार्य करते हैं।
मुशायरे की संरक्षक व कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहाकि मेरे पिता ने राजनीति को कभी कारोबार नहीं समझा। वह पूरी उम्र लोगों की सेवा करते रहे और उन्हीं के दिखाये मार्ग पर चलते हुए मैंने भी हमेशा इसे अपना मकसद माना है। जब भी विकास के नाम पर मुझसे कुछ मांगा गया मैंने हमेशा पूरा किया है और आने वाले दिनों में हमेशा करती रहूंगी।

सरायमीर के कौरागहनी में 14वें आल इंडिया मुशायरे का शुभारंभ पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य व रीता बहुगुणा जोशी ने संयुक्त रूप दीप प्रज्जवलित कर किया। इस दौरान हाजी जियाउद्दीन को शाल व मोमेन्टो देकर सम्मानित किया गया। शादाब आजमी ने नाते पाक से मुशायरे की शुरूआत की। उन्होंने नज्म ‘मेरे खुदा मेरा इतना सा काम हो जाए’ सुनाया।
  वहीं डीपीआरओ आनंद श्रीवास्तव ने नज्म ‘मुझको बचपन की कोई निशानी दे दे’ सुनाया। अख्तर आजमी ने ‘मौलाना आजाद के गुलशन का फूल था मैं भी’ सुनाया। गुलेसबा ने ‘कितनी हसीन आज की ये रात हो गई’ सुनाया। आजाद प्रतापगढ़ी ‘किस सिम्त मुखातिब है किधर बोल रहा है’ सुनाया।  मुमताज आलम रिजवी ने ‘जुल्म ढाने के लिए जब भी सितमगर निकला’ सुनाया।
   हसन काजमी ने ‘मैने माना आईना भी हकीकत है मगर’ सुनाया। जमील खैराबादी ने ‘अजाब होता नाजली तमाम कौमों पर’ सुनाया। मैकश आजमी, शाइस्ता सना, डॉ.शहरयार जलालपुरी, हाशिम फिरोजाबादी, विकास बौखल, अय्यूब वफा, सज्जाद झंझट, रिफात जमाल, अल्ताफ जिया, वसीम, शबीना अदीब, जौहर कानपुरी, खुर्शीद हैदर ने नज्म सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
इस मौके पर आरिफ प्रधान, इसरार अहमद, अनीस अहमद, हिदायतुल्लाह, परवेज कलानी, फैसल, दानिश खान, सिकंदर खान, इरशाद अहमद आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता जेड के फैजान व संचालन मोइन शादाब ने किया। अंत में संयोजक साजिद खान आजमी ने लोगों का आभार जताया।

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