खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई लड़ने वाले आजमगढ़ के लालबिहारी की भूमिका में अभिनेता पंकज त्रिपाठी
फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने एक ऐसे शख्स की भूमिका निभाई है जो कागजी तौर पर मर चुका है। अब दर-दर जाकर कोशिश कर रहा है कि किसी तरह उसके जीवित होने का कागज बन सके। यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। आजमगढ़ के लाल बिहारी की जिंदगी पर आधारित ये फिल्म उस संघर्ष को दिखाती है जो उन्हें खुद को कागजों में जीवित साबित करने के लिए करना पड़ा।
ये फिल्म 7 जनवरी को वीडियो स्ट्रीमिंग पोर्टल ZEE5 पर रिलीज होगी। इस फिल्म को उत्तर प्रदेश के कुछ सिनेमाघरों में भी रिलीज किया जाएगा।
कौन है लालबिहारी मृतक
1955 में जन्मे लाल बिहारी जनपद आजमगढ़ के निजामाबाद तहसील के गांव खलीलाबाद निवासी हैं।आठ माह की अवस्था में पिता चौथी का देहांत हो गया। इसके बाद लाल बिहारी की परवरिश अमिलो में हुई। लालबिहारी जब 21 वर्ष के हुए तो वह कारोबार करने के लिए लोन लेने बैंक गये जहां उनसे जाति प्रमाण पत्र मांगा गया। प्रमाण पत्र को बनवाने के लिए वे तहसील गये वहां के दस्तावेज में उन्हें मृत बताया गया। जिसके बाद उन्होंने अधिकारियों से जाकर कहा कि वह जिंदा हैं, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद लालबिहारी खुद को जिंदा साबित करने में जुट गए, जिसके लिये उनको लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
ऑफिस के चक्कर काटने के बाद उन्होंने वर्ष 1986 के विधानसभा में पर्चे फेंके और गिरफ्तारी दी। आखिरकार 18 साल बाद 1994 में उन्हें जीत मिली और राजस्व रिकार्ड में उन्हें जीवित माना गया। इस लड़ाई ने उनके नाम के साथ मृतक शब्द जुड़ गया और उन्होंने मृतक संघ की स्थापना कर दी। अब वो ऐसे लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं जो कागजों में मृत साबित कर दिए गए हैं।


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