आजमगढ़ के गांव की गलियों से अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल तक, अभिनेता सुजीत अस्थाना की प्रतिभा का डंका
आजमगढ़ : जिले की माटी से निकलकर फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे अभिनेता सुजीत अस्थाना आज अभिनय के साथ-साथ रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में जिले का नाम देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। जिले के ग्राम सभा तरफकाजी, पोस्ट देवगांव के रहने वाले सुजीत की रचनात्मक यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों तक पहुंच चुकी है।
सुजीत अस्थाना को उनके रचनात्मक योगदान के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री तथा जिलाधिकारी आजमगढ़ समेत देश के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने देश के प्रमुख नाट्य महोत्सवों में 100 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियां दी हैं और अब तक 5,000 से अधिक बच्चों को अभिनय का प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।
इंडोनेशिया के फिल्म फेस्टिवल में मिला सम्मान
सुजीत की फिल्म ‘सौदा (Sauda: A Deal)’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। इंडोनेशिया के सिपुत्रा फिल्म फेस्टिवल में फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान इसे ‘ऑनरेबल जूरी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। फिल्म में सुजीत के अभिनय ने दर्शकों और जूरी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
अब दिल्ली में दिखेगी ‘नेशनल फर्नीचर सिंस 1935’
सुजीत अस्थाना की अगली चर्चित फिल्म ‘नेशनल फर्नीचर सिंस 1935’ 23 अगस्त को दिल्ली में आयोजित जागरण इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई। इसके बाद फिल्म आठ राज्यों के 14 शहरों में आयोजित होने वाले जागरण फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनेगी।
फिल्म का इंडियन वर्ल्ड प्रीमियर इसी वर्ष जून में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हो चुका है। इस फिल्म में सुजीत ने बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा के साथ स्क्रीन साझा की है।
आजमगढ़ के दो कलाकारों की सिनेमाई उड़ानखास बात यह है कि दोनों फिल्मों के निर्देशक, लेखक और सह-निर्माता अजय कन्नौजिया भी आजमगढ़ के ही रहने वाले हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), अहमदाबाद से स्नातक और सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (SRFTI), कोलकाता से परास्नातक अजय कन्नौजिया अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं।
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| अजय कन्नौजिया |
सुजीत अस्थाना और अजय कन्नौजिया की यह जोड़ी साबित कर रही है कि छोटे शहर और गांव की मिट्टी से निकली प्रतिभा, अगर जुनून और मेहनत के साथ आगे बढ़े, तो उसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई मंचों तक पहुंच सकती है। आज देवगांव से लेकर पूरे आजमगढ़ तक, इन दोनों कलाकारों की उपलब्धियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

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