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शिकायतकर्ता को सूचना दिए बिना ही पूरी कर ली गयी डंप पड़ी हज़ारो पुरानी किताबों की जाँच



आजमगढ़ : भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय में के बगल में जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण में  भारी मात्रा में डंप पड़ी हज़ारो किताबों व जूता-मोजा के प्रकरण में जांच पूरी कर लिया गया है।
जबकि मंडलायुक्त आज़मगढ़ मण्डल व जिलाधिकारी महोदय को ज्ञापन सौंपकर मांग किया था की हम शिकायतकर्ताओं व मीडिया के सामने ही बंद कमरों को खोला जाए जिससे कि विभिन्न अधिकारियों के द्वारा दिये गए भ्रामक आंकड़ो को स्पष्ट किया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाते हुए पूछा कि शिकायतकर्ताओं को बिना सूचना दीए ही सील कमरों को क्यों खोल दिया गया?
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने समाचार पत्रों में बयान दिया था कि स्टॉक रजिस्टर गायब है, जिन किताबों को बंद कमरों में पाया गया अब क्या उसका मिलान बिना स्टॉक रजिस्टर के ही कर लिया गया?
इस प्रकरण में 3 बार जांच अधिकारी क्यों बदले गए, पहले एसडीएम फिर सीडीओ फिर डीडीओ क्या बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बचाने के लिए यह सब किया जा रहा है?
जब पहले स्टॉक रजिस्टर गायब था तो नई किताबों का क्रय इस वर्ष किस आधार पर किया गया?
पुस्तको के धुलाई का आदेश व भुगतान किस आधार पर हुआ?
इस प्रकरण में जिलाधिकारी की भूमिका व बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि शुरू से मामले में हीलाहवाली किया जा रहा है बिना शिकायतकर्ता को सूचना दिए कमरों को खोलना निन्दनीय है।
इस प्रकरण में उचित कार्यवाही न होने पर माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर पुनः किसी उच्चस्तरीय अधिकारी से जांच करने व जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ उचित कार्यवाही के लिए मांग किया जाएगा।

आजमगढ़ रिपोर्ट 

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