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पटाखा विस्फोट कांड : तीन जिंदगिया बचाने वाला खुद नही बच गया




आजमगढ़ : शहर के मुकेरीगंज में रविवार को हुए पटाखा विस्फोट में तीन जिदगियां बचाने वाले अजय मौर्य की घटना के चौथे दिन में मौत गई। अजय की मौत से पत्नी सहित तीन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
    कोतवाली के शेखपुरवा गांव निवासी 30 वर्षीय अजय मौर्य पुत्र चंद्रशेखर मौर्य मुकेरीगंज पटाखा विस्फोट के दौरान खिलाड़ी गुप्ता के मकान में मजदूरी का कार्य करता था। घटना के दिन भी राजगीर मिस्त्री के साथ कार्य कर रहा था। इस बीच अचानक आग लग गई और अपने सामने वह चार लोगों को जलते देखकर किसी तरह पीछे के हिस्से से बाहर निकला था। इसके बाद आगे हिस्से में आग से घिरी खिलाड़ी की पत्नी आभा गुप्ता, आठ वर्षीय वेदिका, छह वर्षीय निवेदिता को सकुशल बाहर निकाल लिया। इस दौरान वह पूरी तरह से झुलस गया था। उसका उपचार शहर के ग्लोबल हास्पिटल में चल रहा था। चार दिन तक जीवन व मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार बुधवार की सुबह उसने अंतिम सांस ली। उसके घर पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। अजय मौर्य की पत्नी संजू के अलावा सात वर्ष की पुत्री आकृति, पांच वर्षीय पुत्र आर्यन व तीन वर्षीय पुत्र आदर्श हैं। मां करोड़पति का तो बुरा हाल है।

    बुधवार दोपहर लगभग एक बजे पोस्टमार्टम के बाद जिला अस्पताल से निकलते ही परिजनों के साथ ही ग्रामीणों ने सड़क पर शव रख कर रोड जाम कर दिया। जाम की सूचना मिलने पर एसपी सिटी कमलेश बहादुर, एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह, सीओ सिटी, एसडीएम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचने पर ग्रामीण आर्थिक सहायता की मांग पर अड़ गए। लगभग ढाई बजे एसपी सिटी कमलेश बहादुर ने जांच कर दोषी डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही चुनाव आचार संहिता को देखते हुए हर संभव मदद करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही। इस पर शव लेकर ग्रामीणों की भीड़ आगे बढ़ी। साथ में पुलिस फोर्स भी पीछे-पीछे लगी रही। मृतक के घर पर अंतिम संस्कार होने तक पुलिस फोर्स तैनात रही।


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