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दीनदयाल अन्त्योदय योजना, एनआरएलएम, मनरेगा एवं मनरेगा के कन्वर्जेन्स विषयक मण्डलीय कार्यशाला सम्पन्न



बृजभूषण रजक रिपोर्ट
आज़मगढ़ : प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त एनपी सिंह ने कहा है कि गरीबी उन्मूलन के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं के सम्बन्ध में निर्गत दिशा निर्देशों के अनुसार यदि दृृढ़ संकल्प के साथ योजनाओं को संचालित किया जाय तो निश्चित रूप से इस दिशा में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से प्रधानमन्त्री आवास योजना के प्रति लगन और परिश्रम करते हुए प्रदेश में 96 प्रतिशत आवास बना लिये गये हैं उसी प्रकार गरीबी उन्मूलन के हेतु संचालित योजनाओं दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (मनरेगा) को एक दूसरे से जोड़कर संचालित किया जाये तो निश्चित रूप से हमें अन्य प्रदेशों की भांति इस प्रदेश में भी उसके सार्थक परिणाम दृष्टिगोचर होंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन योजनाओं के सफल संचालन में शासन द्वारा निर्गत दिशा निर्देशों को पूर्ण ज्ञान होना भी अतिआवश्यक है। आयुक्त ग्राम्य विकास श्री सिंह ने बुधवार को मण्डलायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित दीनदयाल अन्त्योदय योजा, एनआरएलएम एवं मनरेगा के कन्वर्जेन्स (अभिसरण) विषयक कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मनरेगा योजना के अन्तर्गत अनुमन्य 260 कार्य हैं, परन्तु पूर्ण जानकारी के अभाव में इसका क्रियान्वयन शासन की मंशा के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थिति सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि मनरेगा के तहत अनुमन्य सभी कार्यों, धाराओं आदि के सम्बन्ध में एक-एक बिन्दु का ध्यानपूर्वक पुनः अध्ययन कर लें ताकि देश के अन्य राज्यों की भांति अन्य योजनाओं से जोड़कर उसका समुचित लाभ पात्र लाभार्थियों को दिया जा सके। उन्होंने कहा कि विकास खण्ड स्तर पर भी 50-50 की क्रमवार कार्यशालायें आयोजित किया जाना है जिसमें विकास विभाग के साथ ही अन्य सम्बन्धित विभाग के अधिकारी एवं ग्राम प्रधान आदि सम्मिलित होंगे। 


  आयुक्त, ग्राम्य विकास एनपी सिंह ने कहा कि वर्ष 2011-12 के सर्वे में जो ग्रामीण आवासहीन थे उनमें से अधिकांश अन्य प्रान्तों में जाकर मेहनत मजदूरी करके आवासों की व्यवस्था कर ली है। उन्होने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को मनरेगा के तहत अनुमन्य कार्यों से जोड़कर उनकी आय में बढ़ोतरी का प्रयास किया जाय ताकि उन्हें अपने परिवार से दूर अन्य प्रान्तों में जाकर नारकीय जीवन व्यतीत करने की विवशता से बचाया जा सके। आयुक्त ग्राम्य विकास श्री सिंह ने कहा कि मनरेगा में जहां तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों की उपलब्धि 150 प्रतिशत रहती है वहीं हमारे प्रदेश की उपलब्धि 50 प्रतिशत से कुछ अधिक होती है। श्री सिंह ने गावों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि गावों के विकास के लिए प्राकृति संसाधनों को संरक्षित अतिआवश्यक है और इन प्राकृति संसाधनों को संरक्षित रखते के लिए मनरेगा में गुंजाइश काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में सम्पर्क मार्ग, आन्तरिक गलियाॅं ही नहीं बल्कि किसानों को उनके खेत तक के पहुंच मार्ग को भी मनरेगा के तहत आरसीसी निर्मित किया गया है। यह सब तभी संभव हुआ है जब अन्य योजनाओं को भी मनरेगा से जोड़ा गया है। कार्यशाला में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय योजना आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी।
  इस अवसर पर प्रदेश के संयुक्त निदेशक, मनरेगा अजय प्रकाश, संयुक्त विकास आयुक्त पीएन वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी आज़मगढ़ डीएस उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी बलिया बीएन सिंह, मुख्य विकास अधिकारी मऊ अरविन्द कुमार मिश्र, जिला विकास अधिकारी आज़मगढ़ रविशंकर राय, पीडी आज़मगढ़ अभिमन्यू कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग, तीनों जनपद के डीसी मनरेगा, बीडीओ सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।


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