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अब गाय को देखकर कांपते हैं कसाई!— श्याम बिहारी गुप्ता, गायों से बदलेगी किस्मत! जानिए सरकार की योजना...



आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बुधवार को मंडलीय समीक्षा बैठक के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को लेकर चल रही योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस पहल को राष्ट्रीय मिशन घोषित किया गया है, जिससे देश में प्राकृतिक खेती को नया आयाम मिलेगा।

श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत जो किसान गोआश्रय स्थलों से गायों को अपने घर ले जाकर पालन-पोषण करेंगे, उन्हें सरकार द्वारा प्रति गाय प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह योजना किसानों को गौपालन के लिए प्रेरित करने और बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए बनाई गई है।

अब गाय को देखकर कांपते हैं कसाई

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “पहले कसाई को देखकर गाय कांपती थीं, अब गाय को देखकर कसाई कांप रहे हैं।” यह बयान राज्य सरकार की गोतस्करी और अवैध कत्लखानों पर लगाम लगाने की कार्रवाई की ओर इशारा करता है।



गौशालाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर

गुप्ता ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 1 करोड़ 90 लाख देसी गायें हैं, और राज्य में 7717 गोशालाओं में 12 लाख 58 हजार गोवंश संरक्षित हैं। इन गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने, गोबर और गोमूत्र आधारित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने तथा बायोगैस प्लांट का विस्तार करने की योजना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान के दरवाजे पर कम से कम दो गाय हों और खेतों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती हो।

किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की योजना है कि हर किसान के घर पर कम से कम दो गाय हों और खेतों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती की जाए। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि उपज भी गुणवत्तापूर्ण होगी।

साथ ही, गौशालाओं को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित कर किसानों और स्वयं सहायता समूहों को जैविक उत्पाद निर्माण, बायोगैस उत्पादन और प्राकृतिक खेती में दक्ष किया जाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

अवैध कब्जे हटाकर बढ़ेगा चारा उत्पादन

प्रदेश में चारागाह भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाएगा और इसका उपयोग चारे के उत्पादन में किया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर गोबर-गोमूत्र प्रसंस्करण इकाइयां और बायोगैस नेटवर्क का भी विस्तार किया जाएगा।

प्राकृतिक खेती से दूर होंगी बीमारियाँ और गरीबी

श्याम बिहारी गुप्ता ने जोर देकर कहा कि गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से न केवल खेती की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि इससे शुद्ध अन्न, स्वस्थ जीवन, किसानों की आर्थिक मजबूती और बेरोजगारी व बीमारियों से भी राहत मिलेगी।

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