आजमगढ़ जेल में बड़ा फर्जीवाड़ा : रिहा हुआ कैदी 17 महीने से जेल अधीक्षक के खाते से खर्च रहा था रुपये, अब तक 30 लाख किए खत्म
आजमगढ़ : जिला जेल से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बंद एक कैदी ने जेल प्रशासन की लापरवाही और अंदरुनी मिलीभगत का फायदा उठाकर सरकारी खाते से करीब 30 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर डाली। यह सब कुछ जेल अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर और चोरी की गई चेक बुक के जरिए हुआ। मामले के खुलासे के बाद जेल अधीक्षक की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
बिलरियागंज थाना क्षेत्र के ग्राम जमुआ शाहगढ़ का निवासी रामजीत यादव उर्फ संजय अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल गया था। फरवरी 2023 में उसे कोर्ट से सजा मिली थी, लेकिन 20 मई 2024 को जमानत मिलने के बाद वह जेल से रिहा हो गया।
रिहाई से पहले रामजीत ने जेल के वरिष्ठ सहायक मुर्शिद अहमद की मदद से जेल अधीक्षक के कार्यालय से सरकारी चेकबुक चुरा ली। रिहा होने के अगले ही दिन, यानी 21 मई 2024 को उसने पहली बार 10,000 रुपये बैंक से निकाले। इसके बाद एक के बाद एक करके कई बार चेक के जरिए फर्जी दस्तखत कर लाखों रुपये खाते से उड़ा लिए।
17 महीने तक किसी को भनक नहीं
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 17 महीने तक किसी अधिकारी को इस फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी। रामजीत यादव खुद को जेल का ठेकेदार बताकर नियमित रूप से बैंक पहुंचता रहा और नकदी निकालता रहा। अधिकारियों की नजर तब पड़ी जब 22 सितंबर 2025 को एक बार में 2.60 लाख रुपये निकाले गए।
जब जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह ने बैंक स्टेटमेंट मंगवाया तो पूरा मामला उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि रामजीत जेल अधीक्षक के फर्जी दस्तखत कर अब तक करीब 30 लाख रुपये निकाल चुका था।
चौंकाने वाले खुलासे
जांच में यह भी सामने आया कि रामजीत अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ जेल के अन्य कर्मचारी और बंदी भी शामिल थे। मामले में नामजद चार आरोपियों रामजीत यादव उर्फ संजय, शिवशंकर यादव उर्फ गोरख (हत्या के मामले में बंद कैदी), जेल के वरिष्ठ सहायक मुर्शिद अहमद एवं चौकीदार अवधेश कुमार पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
जेल प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
इस गंभीर मामले ने जेल प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कैसे एक रिहा हुआ कैदी लगातार 17 महीने तक सरकारी खाते से पैसे निकालता रहा और किसी को कोई जानकारी नहीं मिली?
जेल अधीक्षक की तहरीर पर आजमगढ़ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद जेल विभाग में हड़कंप मच गया है।

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