हाई वोल्टेज तार के करेंट से बालक की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने लगाया जाम
आजमगढ़ : रौनापार थाना क्षेत्र के एक गांव में स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पास 11 हजार वोल्ट का काट कर छोड़े गए बिजली तार की चपेट में आने से एक बालक की मौत हो गई। साथ में खेल रही मृत बालक की फुफेरी बहन झुलस गई।
अराजी देवारा नैनिजोर (नई बस्ती) गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव स्थित सरकारी ट्यूबवेल के पास से होकर बिजली के 11 हजार वोल्ट के तार को बिजली विभाग के प्राइवेट कर्मियों ने काटकर छोड़ दिया था। ग्यारह हजार वोल्ट का बिजली का तार काफी दिनों से लटक रहा था। गांव निवासी मातवर निषाद का 5 वर्षीय पुत्र विकास निषाद अपनी फुफेरी बहन 6 वर्षीय गोल्डी पुत्री अमरनाथ के साथ बुधवार को दिन में लगभग साढ़े ग्यारह बजे सरकारी ट्यूबवेल के पास खेल रहे थे। खेलते समय दोनों बच्चे लटक रहे बिजली के तार के स्पर्श में आ गए। जिससे तार में उतर रहे करंट की चपेट में दोनों बालक आ गए। जिससे विकास की घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी फुफेरी बहन झुलस गई। झुलसी गोल्डी गोरखपुर जिले के मझगांवा गांव की निवासी थी। वह अपने मामा के घर आई हुई थी।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने क्षेत्र के प्राइवेट लाइनमैन लुटावन सिंह पुत्र रामरूप सिंह व गोरख सिंह ग्राम सपहा पाठक निवासी को पकड़ लिया और उनकी पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने रौनापार के शहीद चौराहे के पास पहुंच कर शव रखकर रोड को जाम कर दिया। जाम कर रहे ग्रामीण, मृतक के परिजन को मुआवजा दिए जाने व दोषी बिजली विभाग के कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
जाम की खबर पाकर सीओ सगड़ी सुधाकर सिंह, रौनापार थानाध्यक्ष गिरिजेश सिंह, जीयनपुर कोतवाल देवानंद मौके पर पहुंच कर जाम समाप्त कराने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए थे। बाद में एसडीएम सगड़ी पंकज श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंचे, एसडीएम के आश्वासन पर एक घंटा बाद जाम समाप्त हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। झुलसी बालिका को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया है। चक्का जाम समाप्त होने के बाद बिजली विभाग के एसडीओ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृत बालक के परिजन को दस हजार रुपये का आर्थिक सहायता प्रदान किया। मृत बालक की मां ने बिजली विभाग के एसडीओ व जेई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए रौनापार थाने पर तहरीर दी है।
आजमगढ़ रिपोर्ट


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