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भाजपा आज़मगढ़ को इस तेजतर्रार कायस्थ नेता की अनदेखी कहीं भारी न पड़ जाए लोकसभा चुनाव में

  

आजमगढ़ : भारतीय जनता पार्टी ने आज़मगढ़ सदर सीट से भोजपुरी फिल्मों के स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ व लालगंज सुरक्षित सीट से सांसद नीलम सोनकर पर दुबारा भरोशा जताया है, समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माने जाने वाले आज़मगढ़ जिले में यादव, हरिजन, मुस्लिम, ठाकुर, पंडित, कायस्थ, राजभर, पासी, सोनकर समाज ही मिलाकर लगभग कुल 20 लाख वोटर हैं। आज़मगढ़ सदर लोकसभा सीट से 4 बार सांसद रहें बाहुबली रमाकांत यादव को टिकट न देकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ भोजपुरी फ़िल्म स्टार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को टिकट देकर चुनावी मैदान में भेजा है।
दिनेश लाल यादव के प्रथम जनपद आगमन पर उन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे, आज़मगढ़ में भीड़ के लिए तरसने वाली भाजपा को एक संजीवनी सी मिलती दिख रही है, लेकिन ऐसी भीड़ अक्सर हर फ़िल्म स्टार को देखने के लिए उमड़ती तो जरूर है, लेकिन वोट में परिवर्तित नहीं हो पाती है।
आज़मगढ़ में कायस्थ समाज के वोटरों की संख्या निर्णायक है, नगर पालिका आज़मगढ़ में तो कायस्थ समाज का बोलबाला है, यहाँ लगभग 20 हज़ार वोटर हैं और पूरे जिले में लगभग 1 लाख 30 हज़ार कायस्थ वोटर हैं जिनकी अनदेखी नही की जा सकती। आज़मगढ़ में भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष व अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश अध्यक्ष (युवा) सूरज प्रकाश श्रीवास्तव को आजकल जिला व क्षेत्रीय संगठन से कुछ खास तरज़ीह नही मिल रही है, सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने आज़मगढ़ में भाजयुमो को पहचान दिलाई व संघर्ष के बलपर राजनीति में युवाओं के लिए नए कीर्तिमान स्थापित किये। 5 साल से ज्यादा समय तक उन्होंने भाजयुमो जिलाध्यक्ष के पद पर रहकर पार्टी के लिए काम किया, और 15 हज़ार से ज्यादा युवाओं को भाजयुमो से जोड़ा।

सूरज प्रकाश श्रीवास्तव 

  सन् 2010-2011 में जब समाजवादी पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रदेश भर में रथयात्रा चलाकर भारी संख्या में युवाओं को जोड़कर संगठन को मजबूत कर रहें थे उसी समय सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने भाजपा में जुड़कर युवाओं से कोसों दूर हो चुकी इस पार्टी को संजीवनी प्रदान करने का कार्य किया फिर समाजवादी पार्टी को सरकार में कई बार इन्हें प्रशासन से आमना-सामना करना पड़ा, लाठियां भी खायीं, गिरफ्तार भी हुए, लेकिन हौसले नही टूटे। चाहे 2012 का विधानसभा का चुनाव रहा हो या 2014 लोकसभा का चुनाव या फिर 2017 का विधानसभा चुनाव इन्होंने चुनाव में जोरदार मेहनत कर पार्टी को मजबूत करने का कार्य किया, इसका यह नतीज़ा है कि हर बूथ स्तर तक का कार्यकर्ता इनके संघर्ष से भलीभाँति परिचित है।

भाजयुमो जिलाध्यक्ष के पद से कार्यमुक्त होने के बाद इनके प्रदेश या गोरखपुर क्षेत्रीय की टीम में पदाधिकारी बनाये जाने की चर्चा थी, लेकिन गोरखपुर की क्षेत्रीय टीम में इन्हें क्या 11 जिलों से किसी भी कायस्थ युवा को टीम में नही रखा गया। यह भी कहा जाता है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेयी व भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष कुमार राय के करीबी होने के कारण इन्हें पदाधिकारी नही बनाया गया।
सूरज प्रकाश श्रीवास्तव आजमगढ़ जिले के बाहर भी युवाओं के बीच ख़ासे लोकप्रिय हैं तथा कायस्थ समाज में भी ये काफी प्रभावशाली हैं ऐसे में इनकी अनदेखी करके भाजपा अपने मूल वोटर रहे कायस्थ समाज के 1 लाख 30 हज़ार वोटरों की नाराजगी का सामना तो नही ही करना चाहेगी।


1 comment:

  1. BJP always favour business community and had never cared for kayastha votes

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